rediff ILAND
Welcome Guest, | Create your own iLand| Sign In  | New User? Get Started
BLOGS
iLand
Blogs
Friends/Contributors
Guestbook  
 
Rajeev Singhal
Categories
Personal
Love
Positivistic...
emotions
Work
Writing
Dancing
Philosophy
Blogs
Fantasy
What is an RSS feed?
RSS Feed 
imaginative.rediffiland.com/  
Tuesday 7 October, 2008
 01:07 | 8/Jun/2008 |  3 Comment(s)
  Add Rajeev Singhal as Friend     Write to Rajeev Singhal     Forward this link
Increment and appraisal

A friend sent me a hilarious note on increment.I thought of sharing on blog.
हे पार्थ !!(कर्मचारी),
इनक्रीमेंट अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ…
इनसेंटिव नहीं मिला, ये भी बुराहुआ…
वेतन में कटौती हो रही है बुरा हो रहा है, …..
तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो,
तुम अगले इनसेंटिव की चिंताभी मत करो,
बस अपने वेतन में संतुष्ट रहो….
तुम्हारी जेब से क्या गया,जो रोते हो?
जो आया था सब यहीं से आया था …
तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी,
तुम जब नहीं होगे, तब भीचलेगी,
तुम कुछ भी लेकर यहां नहीं आए थे..
जो अनुभव मिला यहीं मिला…
जो भी काम किया वो कंपनी के लिए किया,
डिग़्री लेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे….
जो कंप्यूटर आज तुम्हारा है,
वह कल किसी और का था….
कल किसी और का होगा औरपरसों किसी और का होगा..
तुम इसे अपना समझ कर  मगन हो .. खुशहो…
यही खुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण है…
क्यो तुम व्यर्थचिंता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो,
कौन तु निकाल सकता है… ?
सतत "नियम-परिवर्तन" कंपनी का नियम है…
जिसे तुम "नियम-परिवर्तन" कहते हो, वही तो चाल है…
एक पल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपर स्टारहो,
दूसरे पल में तुम व परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नहीं कर पाते हो..
ऎप्रेजल,इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो,
अपने विचार से मिटादो,

 कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनी के…..
ना ये इन्क्रीमेंटवगैरहतुम्हारे लिए हैं
ना तुम इसके लिये हो,
परंतु तुम्हारा जॉब सुरक्षित है
फिर तुम परेशान  होते हो……..?
तुम अपने आप को कंपनी को अर्पित कर दो,
मत करो इनक्रीमेंट की चिंता…बस मन लगाकर अपना कर्म किये जाओ…
यही सबसे बड़ा गोल्डन रूल है
जो इस गोल्डन रूल को जानता है..वो ही सुखी है…..
वोह इन रिव्यू, इनसेंटिव,ऎप्रेजल,रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है….
तो तुम भी मुक्त होने का प्रयास करो और खुश रहो…..
तुम्हारा बॉस कृष्ण …
ये सुनकर तो हम तो शांत हो गये…आपका क्या विचार है……



Category: Fantasy | Permalink